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Hello friends,
I chose Mimansa as the title of this book because Mimansa itself represents a deep philosophical idea—the “Investigation of Truth.”
In this book, I have tried to depict the struggles, existence, and journey of a woman in a patriarchal society. Mimansa does not ask for your sympathy, but for your respect toward every woman’s fight for her truth and dignity—as a mother, sister, wife, or daughter.
— Author: Pawan Kumar Nirala
‘यथार्थ’ के माध्यम से निराला जी ने जीवन और समाज की गहराइयों को उकेरने का प्रयास किया है। इसमें संघर्ष, प्रेम, लज्जा, त्याग, उपेक्षा, गाँव और शहर जैसे अनेक पहलुओं पर मार्ग की पीड़ाओं को अंकित किया गया है।
इस काव्य-संग्रह में बचपन, बुढ़ापा, अनाथ जीवन, माँ की विवशता, कुरुक्षेत्र, प्रसव पीड़ा और रोटी के टुकड़े जैसे अनगिनत विषयों पर कविताओं के ज़रिए ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई है। यह रचनाएँ हृदय को छूती हैं और पाठक को गहराई से सोचने पर मजबूर करती हैं।
— लेखक: पवन कुमार निराला
‘लम्हें (वक्त के पन्नों पर)’ भूली-बिसरी यादों, बचपन के सुनहरे पलों, प्यार के इज़हार और एहसासों का एक अनूठा संगम है।
यह पुस्तक कल्पनाओं से लेकर हकीकत की हर उस कड़ी को समेटती है, जो एकांत में कहीं खो गई थी। यह तन्हाई में भी आपसे बात करती है, आपके दर्द पर मरहम लगाती है और आपको कभी निराश नहीं होने देती।
लेखक : पवन कुमार निराला
